महिलाएं हो जाएं सावधान, सैनिटरी नैपकिन न इस्तेमाल करने से हो सकती है कई गंभीर बीमारियां


किसी देश का विकास महिलाओं के विकास के समानुपाती होता है। महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य, को लेकर जागरुकता देश के विकास के पैमाने होते हैं। समाज के रुढ़िवादी होने की कीमत अक्सर समाज के सबसे पिछड़े हिस्सों में से एक महिलाओं को चुकानी पड़ती है। पीरियड यानी माहवारी को लेकर हमारे समाज में अभी भी भ्रम है, ये एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में आज भी हम खुल कर बात नहीं करते, जिसकी वजह से अक्सर ही महिलाओं को अनेक भयानक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी के बारे में जागरूकता न होने से समाज का पिछड़ापन और मानसिक दिवालियापन उजागर होता है। माहवारी की समस्याओं से बचने के कई उपायों में से एक है सैनिटरी नैपकिन। अनेक सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा कई जागरूकता अभियान चलाए जाने के बाद सैनिटरी नैपकिन के प्रयोग में वृद्धि तो हुई है, लेकिन सैनिटरी नैपकिन के सही तरीके से इस्तेमाल करने को लेकर भी कई भ्रम हैं।

सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग न करने से महिलाओं में अनेक स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले रही हैं। सैनिटरी नैपकिन को लेकर सबसे बड़ी समस्या एक ही नैपकिन का लम्बे समय तक प्रयोग करना है। माहवारी और सैनिटरी नैपकिन को लेकर जनमानस को जागरूक करने वाली नाइन फाउंडेशन के अनुसार सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करने वाली अधिकतर महिलाएं 12 से 15 घंटे तक एक ही सैनिटरी नैपकिन प्रयोग करती हैं जिससे महिलाओं में होने वाले इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गुप्तांगों में सूजन, यूटेरस इंफेक्शन, बांझपन आदि जैसी घातक बीमारिय़ां हो सकती हैं। इसीलिए माहवारी के समय में एक सैनिटरी नैपकिन को हर 6 से 8 घंटे बाद बदल कर नए नैपकिन का प्रयोग करना चाहिए।


सैनिटरी नैपकिन का सही प्रयोग न करने से स्वास्थ्य समस्याएं तो होती ही हैं साथ ही सैनिटरी नैपकिन पर्यावरण के लिए भी एक खतरा बनता जा रहा है। एक ताजा अध्य्यन के अनुसार एक महिला माहवारी के कुल चक्र में लगभग 125 किलोग्राम गैर जैविक अपशिष्ट उत्पन्न करती है। चूंकि सैनिटरी नैपकिन का अधिकांश भाग प्लास्टिक से निर्मित होता है, इसलिए एक सैनिटरी नैपकिन के विघटित होने में लगभग 500 से 800 वर्ष लग जाते हैं। इसका समाधान इसे रिसाइकल कर के किया तो जा सकता है लेकिन तब जब इसे सही तरीके से प्रयोग कर के पुनः सही तरीके से ही विस्थापित किया जाए। लेकिन प्रयोग के बाद उचित तरीके से विस्थापित न करने से सफाई कर्मचारी इसे घरेलू कूड़ा समझ लेते हैं जिससे यह रिसाइकल होने हेतु उचित स्थान पर नहीं पहुंच पाता।

सैनिटरी नैपकिन को विस्थापित करने के लिए नाइन फाउंडेशन ने हर सैनिटरी नैपकिन के साथ एक डिस्पोजेबल पाउच देना प्रारम्भ किया। प्रयोग के बाद नैपकिन को बीच से मोड़कर पाउच में डालकर ही कूड़ेदान में डालना चाहिए। पाउच में रखे होने की वजह से इसको पहचानने दिक्कत नहीं होती और फलस्वरूप इनको पुनः रिसाइकिल किया जा सकता है। एक पाउच में प्रयोग किया हुआ एक ही नैपकिन डालना चाहिए। सैनिटरी नैपकिन का उचित विस्थापन इसके रिसाइकिल होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है जिससे पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है।
महिलाएं हो जाएं सावधान, सैनिटरी नैपकिन न इस्तेमाल करने से हो सकती है कई गंभीर बीमारियां महिलाएं हो जाएं सावधान, सैनिटरी नैपकिन न इस्तेमाल करने से हो सकती है कई गंभीर बीमारियां Reviewed by Hindi Khabar on May 19, 2020 Rating: 5
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