थाणे स्थित कोकून फर्टिलिटी के को-फाउंडर और गाइनोकोलोजिस्ट डॉक्टर अनघा कारखानीस आपको इन तमाम सवालों के जवाब दे रहे हैं। ओसीपी दो प्रकार की होती हैं- : कंबाइंड ओसीपी, जिसमें एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन दोनों होते हैं।प्रोजेस्टेरोन गोलियां, जिसे मिनी गोली के रूप में भी जाना जाता है, इसमें केवल प्रोजेस्टेरोन ही होते हैं।
यह ओसीपी के प्रकार पर निर्भर करता है। जब आप एक कंबाइंड गोली लेते हैं, तो दोनों हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन पर काम होता है और यदि आप केवल प्रोजेस्टेरोन की गोली लेते हैं, तो केवल एक हार्मोन पर काम होता है। पहला, यह ओव्यूलेशन रोकता है, जिसका अर्थ है कि कोई अंडे नहीं निकलते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि फर्टिलाइजेशन नहीं होता है और इसलिए, गर्भावस्था को रोक दिया जाता है।
दूसरा, यह सर्वाइकल म्यूकस को गाढ़ा करता है जिससे स्पर्म गर्भाशय में नहीं जा पाते हैं। जाहिर है मोटा होने पर स्पर्म अंडे के लिए अपना रास्ता नहीं ले सकते। चूंकि यह अंडे तक पहुंचने में विफल रहता है, जिससे फर्टिलाइजेशन की संभावनाएं प्रभावित होती हैं, जो गर्भावस्था को रोकती हैं।
तीसरा, यह एंडोमेट्रियम के स्तर पर कार्य करता है। जैसा कि एंडोमेट्रियम की परत पतली है, यह आरोपण के लिए मुश्किल बनाता है। इसलिए, भले ही अंडे फर्टिलाइज्ड हो, भ्रूण एंडोमेट्रियम से चिपकने में विफल रहता है, जिससे गर्भावस्था की संभावनाओं में बाधा उत्पन्न होती है।
एस्ट्रोजन- कंबाइंड पिल्स में एस्ट्रोजन हार्मोन की उच्च मात्रा होती है। जब शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर उच्च होता है, तो यह हार्मोन एफएसएच (फॉलिकल स्टिम्यलैटिंग हार्मोन) को दबा देता है जिससे गर्भावस्था को रोकता है। एफएसएच हार्मोन ओव्यूलेशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसलिए, एफएसएच का निम्न स्तर ओवल्यूशन को रोकता है और इस तरह, गर्भावस्था की संभावना कम होती है।
नुकसान : इन गोलियों से भविष्य में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ब्लीडिंग सहित कई दिक्कतें महिलाओं को होती है। कई महिलाओं की तो इसी चक्कर में जान तक चली जाती है।
शरीर में कैसे काम करती है गर्भनिरोधक गोली..जानने के बाद कभी नहीं खाएंगी महिलाएं
Reviewed by Hindi Khabar
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May 26, 2020
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